1 तब नामात के रहइया सोपर ह जबाब दीस:
2 “मोर बियाकुल बिचार ह मोला उकसावत हे कि मेंह जबाब दंव
3 मेंह एक डांट सुनेंव, जेकर ले मोर अपमान होथे,
4 “खचित तेंह जानत हस कि पुराना जमाना ले येह कइसे हवय,
5 दुस्टमन के खुसी ह थोरकून समय के अय,
6 हालाकि भक्तिहीन मनखे के घमंड ह अकास तक हबरथे
7 पर ओह अपन खुद के संडास सहीं सदाकाल बर नास हो जाही;
8 सपना कस ओह उड़ जाथे, अऊ फेर कभू नइं मिलय,
9 जऊन आंखी ह ओला देखे रिहिस, ओह ओला फेर नइं देखही;
10 ओकर लइकामन गरीबमन ले दया के आसा करहीं;
11 जऊन जवानी के बल ह ओकर हाड़ामन म भरे रहिथे,
12 “हालाकि बुरई ह ओकर मुहूं म मीठ लगथे
13 हालाकि ओह ओला छोंड़े बर नइं चाहय
14 तभो ले ओकर जेवन ह पेट म करू हो जाही;
15 जऊन धन ला ओह लील ले रिहिस, ओह ओला निकाल दीही;
16 ओह सांपमन के जहर ला चुहकही;
17 ओह ओ झरना अऊ नदियामन के आनंद नइं उठा सकही,
18 जेकर बर ओह कठोर मेहनत करिस, ओला बिगर खाय ओह वापिस करही;
19 काबरकि ओह कंगालमन ऊपर अतियाचार करे हवय अऊ ओमन ला बेसहारा छोंड़ दे हवय;
20 “खचित, ओकर लालसा के कभू अन्त नइं होवय;
21 खाय बर ओकर लिये कुछू नइं बांचे हवय;
22 ओकर धन अऊ सफलता के समय म ओला दुख ह घेर लीही;
23 जब ओह अपन पेट ला भर चुके होही,
24 हालाकि ओह लोहा के हथियार ले बच निकलथे,
25 ओह ये बान ला तीरके ओकर पीठ ले निकालथे,
26 ओकर धन-संपत्ति बर घिटके अंधियार ह बाट जोहथे।
27 अकास ह ओकर अपराध ला परगट करही;
28 पानी के बाढ़ ह ओकर घर ला बोहाके ले जाही,
29 परमेसर ह दुस्ट मनखे के हालत अइसने करथे,