1 “मेंह अपन जिनगी ले घिन करथंव;
2 मेंह परमेसर ला कहिथंव: मोला दोसी झन ठहिरा,
3 का मोला सताना,
4 का तोर आंखीमन मनखे के आंखी कस हवंय?
5 का तोर उमर के दिन ह मनखे के दिन कस छोटे अय
6 कि तेंह मोर गलतीमन ला खोजबे
7 हालाकि तेंह जानत हस कि मेंह दोसी नो हंव
8 “तोर हांथमन मोला रूप देय हवंय अऊ मोला बनाय हवंय।
9 सुरता कर कि तेंह मोला माटी ले बनाय हवस।
10 का तेंह मोला दूध के सहीं नइं रितोय
11 का तेंह मोर ऊपर मांस अऊ चमड़ी नइं चघाय
12 तेंह मोला जिनगी देय अऊ मोर ऊपर दया करय,
13 “पर तेंह अपन हिरदय म ये बातमन ला लुकाके राखे हवस,
14 कहूं मेंह कोनो पाप करेंव, त तेंह ओला देखत होबे
15 कहूं मेंह दोसी अंव, त दुख-तकलीफ मोर ऊपर आवय,
16 यदि मेंह अपन मुड़ ला उठावंव, त तेंह सेर के सिकार करे सहीं लुकाके मोर पीछा करथस
17 तेंह मोर बिरोध म नवां गवाहमन ले आथस
18 “फेर तेंह मोला गरभ ले निकाले काबर?
19 मोर रचना नइं होय रहितिस,
20 का मोर बांचे जिनगी के दिनमन थोरकून नइं ए?
21 येकर पहिली कि मेंह ओ जगह म जावंव, जिहां ले कोनो नइं लहुंटंय,
22 याने ओ जगह, जिहां घोर रथिया,