1 “मेंह अपनआप ला ओमन ऊपर परगट करेंव, जऊन मन मोर बारे म नइं पुछिन;
2 मेंह एक हठी जाति के मनखेमन कोति
3 अइसन मनखे, जेमन मोर आंखी के आघू म ही
4 येमन कबरमन के बीच बईठथें
5 जेमन आने मन ला कहिथें, ‘हट जा; मोर तीर म झन आ,
6 “देखव, ये बात मोर आघू म लिखाय हे:
7 तुम्हर पाप अऊ तुम्हर पुरखामन के पाप ला,”
8 यहोवा ह ये कहत हे:
9 में याकूब म ले संतान लानहूं,
10 मोर मनखे, जऊन मन मोला खोजथें,
11 “पर जहां तक तुम्हर बात ए, जऊन मन यहोवा ला छोंड़ देथव
12 में तुमन ला तलवार के कौंरा बनाहूं,
13 एकर कारन परमपरधान यहोवा ह ये कहत हे:
14 मोर सेवकमन अपन मन के
15 तुमन अपन नांव ला छोंड़हू
16 जऊन कोनो देस म आसीस मांगथे
17 “देखव, मेंह नवां अकास
18 एकर कारन जऊन कुछू के मेंह सिरिस्टी करथंव,
19 में यरूसलेम ऊपर आनंदित होहूं
20 “ओमा फेर न तो कुछू दिन के लइका,
21 ओमन घर बनाके ओमा बसहीं;
22 अइसन नइं होवय कि ओमन बनावंय अऊ दूसरमन ओमा बसंय,
23 ओमन के मेहनत ह बेकार नइं होवय,
24 ओमन के पुकारे के पहिली ही में ओमन ला उत्तर दूहूं;
25 भेड़िया अऊ मेढ़ा-पीला एके संग चरहीं,