1 “उठ, चमकदार हो; काबरकि तोर अंजोर ह आय हवय,
2 देख, धरती ऊपर अंधियार
3 जाति-जाति के मनखेमन तोर मेर अंजोर बर,
4 “अपन चारों कोति आंखी उठाके देख:
5 तब तें देखबे अऊ तें चमकबे,
6 तोर देस ह ऊंटमन के झुंड ले भर जाही,
7 केदार छेत्र के पसुमन के झुंड ला तोर मेर इकट्ठा करे जाही,
8 “येमन कोन अंय, जेमन बादर सहीं,
9 सच म द्वीपमन मोर रसता देखथें;
10 “परदेसीमन तोर सहर के दीवार ला फेर बनाहीं,
11 तोर दुवारमन हरदम खुला रहिहीं,
12 काबरकि जऊन जाति या राज के मन तोर सेवा नइं करहीं, ओमन नास हो जाहीं;
13 “लबानोन के वैभव तोर मेर आही,
14 तोला दुख देवइयामन के लइकामन मुड़ नवाके तोर मेर आहीं;
15 “हालाकि तोला छोंड़ दिये गे हवय अऊ तोर ले घिन करे जाथे,
16 तें जाति-जाति के मनखेमन के दूध पीबे
17 में कांसा के बदला सोन,
18 तोर देस म फेर कभू हिंसा के बात
19 दिन म सूरज ह फेर तोर अंजोर नइं होही,
20 तोर सूरज फेर कभू नइं बुड़ही,
21 तब तोर मनखेमन सब के सब धरमी होहीं
22 तुमन म छोटे ले छोटे ह एक हजार हो जाही,