Isaías 60

HNE

1 “उठ, चमकदार हो; काबरकि तोर अंजोर ह आय हवय,

2 देख, धरती ऊपर अंधियार

3 जाति-जाति के मनखेमन तोर मेर अंजोर बर,

4 “अपन चारों कोति आंखी उठाके देख:

5 तब तें देखबे अऊ तें चमकबे,

6 तोर देस ह ऊंटमन के झुंड ले भर जाही,

7 केदार छेत्र के पसुमन के झुंड ला तोर मेर इकट्ठा करे जाही,

8 “येमन कोन अंय, जेमन बादर सहीं,

9 सच म द्वीपमन मोर रसता देखथें;

10 “परदेसीमन तोर सहर के दीवार ला फेर बनाहीं,

11 तोर दुवारमन हरदम खुला रहिहीं,

12 काबरकि जऊन जाति या राज के मन तोर सेवा नइं करहीं, ओमन नास हो जाहीं;

13 “लबानोन के वैभव तोर मेर आही,

14 तोला दुख देवइयामन के लइकामन मुड़ नवाके तोर मेर आहीं;

15 “हालाकि तोला छोंड़ दिये गे हवय अऊ तोर ले घिन करे जाथे,

16 तें जाति-जाति के मनखेमन के दूध पीबे

17 में कांसा के बदला सोन,

18 तोर देस म फेर कभू हिंसा के बात

19 दिन म सूरज ह फेर तोर अंजोर नइं होही,

20 तोर सूरज फेर कभू नइं बुड़ही,

21 तब तोर मनखेमन सब के सब धरमी होहीं

22 तुमन म छोटे ले छोटे ह एक हजार हो जाही,

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