1 “हे सब पीयासन मनखेमन,
2 जऊन ह खाय के चीज नो हय, ओकर बर काबर रूपिया खरच करन,
3 कान लगावव, अऊ मोर करा आवव;
4 सुनव, मेंह ओला राज-राज के मनखेमन बर एक गवाह,
5 खचित तें अइसन जातिमन ला बलाबे, जेमन ला तें नइं जानस,
6 जब तक यहोवा मिल सकथे, तब तक ओकर खोज म रहव;
7 दुस्ट ह अपन चालचलन
8 “काबरकि मोर बिचार अऊ तुम्हर बिचार एक सहीं नो हंय,
9 “जइसे अकास ह धरती ले ऊंच हवय,
10 जइसे बरसा अऊ बरफ
11 वइसे ही मोर बचन घलो अय, जऊन ह मोर मुहूं ले निकलथे:
12 काबरकि तुमन आनंद के संग निकलहू,
13 कंटिली झाड़ी के बदले सनोवर रूख उगही,