1 मेंह अपन मयारू बर गीत गाहूं
2 ओह ओकर माटी खनिस अऊ ओमा के पथरामन ला हटाईस
3 “अब हे यरूसलेम के रहइया अऊ यहूदा के मनखेमन,
4 मोर अंगूर के बारी बर अऊ का खंग गीस
5 अब मेंह तुमन ला बताहूं
6 मेंह येला उजार दूहूं,
7 सर्वसक्तिमान यहोवा के
8 ओमन ऊपर हाय, जेमन घर ले घर,
9 सर्वसक्तिमान यहोवा ह मोर सुनत म घोसना करे हवय:
10 दस एकड़ के अंगूर के बारी ले सिरिप एक बत अंगूर के मंद मिलही;
11 ओमन ऊपर हाय, जेमन मंद पीये बर
12 ओमन के जेवनारमन म बीना, सारंगी,
13 एकरसेति समझ के कमी के कारन
14 एकरसेति मिरतू ह अपन जबड़ा ला
15 सधारन मनखेमन दबाय जाहीं
16 पर सर्वसक्तिमान यहोवा ह अपन नियाय के दुवारा ऊपर उठही,
17 तब भेड़मन अपन चरागन म चरहीं;
18 ओमन ऊपर हाय, जेमन पाप ला धोखा के डोरी,
19 जेमन कहिथें, “परमेसर ह जल्दी करय;
20 ओमन ऊपर हाय, जेमन बुरा ला भला
21 ओमन ऊपर हाय, जेमन अपन खुद के आंखी म बुद्धिमान
22 ओमन ऊपर हाय, जेमन अंगूर के मंद पीये म बीर
23 जऊन मन घूस लेके दोसी मनखे ला छोंड़ देथें,
24 एकरसेति, जइसने आगी के जुवाला ले पैंरा ह भसम हो जाथे
25 एकरसेति यहोवा के रिस ह अपन मनखेमन ऊपर भड़कथे;
26 ओह दूरिहा-दूरिहा के जाति के मनखेमन बर एक झंडा ठाढ़ करथे,
27 ओमा के कोनो घलो न तो थकंय अऊ न ही कोनो हपटंय,
28 ओमन के तीरमन चोख होथें,
29 ओमन के गरजन ह सिंह के गरजन सहीं होथे,
30 ओ दिन ओमन येकर ऊपर