1 हे द्वीपमन, मोर बात ला सुनव;
2 ओह मोर मुहूं ला चोख तलवार सहीं बनाईस,
3 ओह मोला कहिस, “तेंह मोर सेवक इसरायल अस,
4 तब मेंह कहेंव, “में तो बेकार म मेहनत करें;
5 अऊ अब यहोवा ह कहिथे—
6 यहोवा ह कहिथे:
7 जऊन ह मनखेमन म तुछ जाने जाथे, जेकर ले जाति ह घिन करथे,
8 यहोवा ह ये कहत हे:
9 अऊ बंधुवई म गय मनखेमन ला कहे जावय, ‘बाहिर आवव,’
10 ओमन न तो भूखन होहीं, न ही पीयासन,
11 मेंह अपन सब पहाड़मन ला सड़क बना दूहूं,
12 देखव, ओमन दूरिहा ले आहीं—
13 हे अकास, आनंद के मारे जय-जयकार कर;
14 पर सियोन ह कहिस, “यहोवा ह मोला तियाग दे हवय,
15 “का कोनो दाई अपन दूध पीयत लइका ला भुला सकत हे
16 देख, मेंह अपन हथेली म खोदके तोर तसबीर बनाय हंव;
17 तोर लइकामन जल्दी करके वापिस आवत हें,
18 अपन आंखी उठाके चारों कोति देख;
19 “हालाकि तेंह नास होके उजाड़ पड़े रहय
20 तोर दुख के समय जनमे लइकामन
21 तब तें अपन मन म कहिबे,
22 परमपरधान यहोवा ह ये कहत हे:
23 राजामन तोर पालक ददा
24 का बीर के हांथ ले सामान लूटे जा सकथे,
25 पर यहोवा ह ये कहत हे:
26 में तोर ऊपर अतियाचार करइयामन ला ओहीचमन के मांस खवाहूं;