1 “हे द्वीपमन, मोर आघू म चुप रहव!
2 “कोन ह पूरब दिग ले एक झन ला उभारे हे,
3 ओह ओमन के पीछा करथे अऊ बिगर हानि के,
4 कोन ह ये काम करे हवय अऊ येला इहां तक लाने हवय
5 द्वीपमन येला देखे हवंय अऊ डरथें;
6 ओमन एक-दूसर के सहायता करथें
7 लोहार ह सुनार ला
8 “पर हे मोर सेवक, इसरायल,
9 मेंह तोला धरती के छोर ले लेंव,
10 झन डर, काबरकि में तोर संग हवंव;
11 “देख, ओ जम्मो जेमन तोर ले गुस्सा होथें
12 तेंह अपन बईरीमन ला खोजबे घलो
13 काबरकि में यहोवा तोर परमेसर अंव
14 हे कीरा सहीं याकूब, झन डर,
15 देख, मेंह तोला बहुंत दांतमन के संग नवां
16 तें ओमन ला फटकबे, अऊ हवा ओमन ला उड़ियाके ले जाही,
17 “गरीब अऊ जरूरतमंद मनखेमन पानी के खोज करथें,
18 में सूखा पहाड़ीमन ले नदीमन ला
19 मेंह मरू-भुइयां म देवदार, बंबरी, मेंहदी,
20 ताकि मनखेमन देखंय अऊ जानंय,
21 “अपन मामला ला लानव,”
22 “हे मूरतीमन, हमन ला बतावव,
23 भविस्य म जऊन कुछू होवइया हे, तेला बतावव,
24 पर तुमन कुछू घलो नो हव,
25 “मेंह उत्तर दिग ले एक झन ला उकसाय हंव, अऊ ओह आवत हे—
26 कोन ह ये बात ला सुरूआत ले बताईस कि हमन ये जानतेंन,
27 सबले पहिली मेंह सियोन ला बताएंव, ‘देख, ओमन इहां हवंय!’
28 मेंह खोजथंव, पर उहां कोनो नइं एं—
29 देखव, ओमन जम्मो के जम्मो गलत अंय!