1 हे नास करइया, तोर ऊपर हाय,
2 हे यहोवा, हमर ऊपर अनुग्रह कर;
3 तोर सेना के हुल्लड़ करे ले मनखेमन भाग जाथें;
4 जइसन जवान फांफामन खेत ला चट कर डारथें;
5 यहोवा ह ऊपर उठाय जाथे, काबरकि ओह ऊंच जगह म रहिथे;
6 यहोवा ह तुम्हर समय बर जरूरी आधार,
7 देख, ओमन के सूरबीरमन गलीमन म जोर-जोर से रोवत हवंय;
8 राजमार्गमन सुनसान परे हवंय,
9 भुइयां ह सूखत हे अऊ बेकार होवत हे,
10 यहोवा ह कहिथे, “अब मेंह उठहूं,
11 तुमन भूंसा ला गरभ म धरथव,
12 मनखेमन जरके राख हो जाहीं;
13 तुमन, जेमन बहुंत दूरिहा म हवव, सुनव कि मेंह का करे हंव;
14 सियोन के पापीमन डर गे हवंय;
15 ओमन, जेमन धरमीपन म चलथें
16 ओहीचमन ही ऊंचहा जगह म निवास करहीं,
17 तेंह अपन आंखी ले राजा ला ओकर सोभा समेत देखबे
18 अपन मन म तेंह पहिले के आतंक के दिन ला सुरता करबे:
19 तेंह ओ जिद्दी मनखेमन ला फेर नइं देखबे,
20 सियोन कोति देख, हमर तिहारमन के सहर;
21 उहां यहोवा ह हमर सक्तिसाली जन होही।
22 काबरकि यहोवा ह हमर नियायी ए,
23 तोर जहाज के रस्सीमन ढीला हो गे हवंय:
24 सियोन म रहइया कोनो घलो ये नइं कहिहीं, “मेंह बेमार हंव”;