1 दमिस्क सहर के बिरूध एक अगमबानी:
2 अरोएर के नगरमन निरजन हो जाहीं
3 एपरैम के गढ़वाला नगर
4 “ओ दिन याकूब के महिमा ह घट जाही;
5 येह अइसन होही, मानो खड़े फसल ला मनखेमन लुवत हें,
6 तभो ले कुछू सीला ह छूट जाही,
7 ओ दिन मनखेमन अपन सिरिस्टीकर्ता कोति देखहीं
8 ओमन अपन हांथ के बनाय
9 ओ दिन ओमन के गढ़वाले नगरमन, जेमन ला ओमन इसरायलीमन के डर के मारे छोंड़ देय रिहिन, अइसन होहीं, जइसन झाड़ी-झंखाड़ अऊ घांस-पूस बर जगहमन ला छोंड़े जाथे। ओ जम्मो उजार परे होहीं।
10 काबरकि तुमन अपन उद्धारकर्ता परमेसर ला भुला गे हव;
11 हालाकि तुमन ओ पऊधामन ला बढ़ाय बर बाड़ा लगाथव
12 ओ बहुंते जाति के मनखेमन ऊपर हाय, जेमन गरजथें—
13 हालाकि मनखेमन पानी के उमड़त लहरामन सहीं गरजथें,
14 सांझ के बेरा, अचानक आतंक!