1 अपन जवानी के दिन म
2 येकर पहिले कि सूरज अऊ अंजोर
3 जब घर के रखवारमन कांपे लगंय,
4 जब गली तरफ के कपाटमन बंद हो जावंय
5 जब मनखेमन ऊंचहा जगह
6 ओला सुरता करव—येकर पहिले कि चांदी के डोर ह कठोर हो जावय,
7 अऊ धुर्रा ह भुइयां म लहुंट जावय, जिहां ले येह आय रिहिस,
8 “बेकार अय! बेकार अय!” गुरू ह कहिथे।
9 गुरू ह सिरिप बुद्धिमान ही नइं रिहिस, पर ओह मनखेमन ला गियान घलो दीस। ओह बिचार करिस अऊ खोजबीन करिस अऊ बहुंते नीतिबचनमन ला सही ढंग ले रखिस।
10 गुरू ह सिरिप सही सबद पाय बर खोजबीन करिस, अऊ जऊन बात ओह लिखिस, ओ बातमन सही अऊ सच अंय।
11 बुद्धिमान के बातमन लउठी के धार सहीं होथें, ओमन के सांत मन के कहावतमन बने ढंग ले ठोंके गय खीलामन सहीं होथें—मानो येला एकेच चरवाहा के दुवारा दिये गे हवय
12 हे मोर बेटा, येकर अलावा अऊ आने बातमन के बारे म सावधान रहिबे।
13 अब जम्मो बात सुने जा चुके हवय;
14 काबरकि परमेसर ह हर काम के नियाय करही,