Salmos 74

HINCV

1 परमेश्वर! आपने क्यों हमें सदा के लिए शोकित छोड़ दिया है?

2 स्मरण कीजिए उन लोगों को, जिन्हें आपने मोल लिया था,

3 इन चिरस्थाई विध्वंस अवशेषों के मध्य चलते फिरते रहिए,

4 एक समय जहां आप हमसे भेंटकरते थे, वहां शत्रु के जयघोष के नारे गूंज रहे हैं;

5 उनका व्यवहार वृक्षों और झाड़ियों पर

6 उन्होंने कुल्हाड़ियों और हथौड़ों से

7 उन्होंने आपके मंदिर को भस्म कर धूल में मिला दिया है;

8 उन्होंने यह कहते हुए संकल्प किया, “इन्हें हम पूर्णतः कुचल देंगे!”

9 अब कहीं भी आश्चर्य कार्य नहीं देखे जा रहे;

10 परमेश्वर, शत्रु कब तक आपका उपहास करता रहेगा?

11 आपने क्यों अपना हाथ रोके रखा है, आपका दायां हाथ?

12 परमेश्वर, आप युग-युग से मेरे राजा रहे हैं;

13 आप ही ने अपनी सामर्थ्य से समुद्र को दो भागों में विभक्त किया था;

14 लिवयाथान के सिर भी आपने ही कुचले थे,

15 आपने ही झरने और धाराएं प्रवाहित की;

16 दिन तो आपका है ही, साथ ही रात्रि भी आपकी ही है;

17 पृथ्वी की समस्त सीमाएं आपके द्वारा निर्धारित की गई हैं;

18 याहवेह, स्मरण कीजिए शत्रु ने कैसे आपका उपहास किया था,

19 अपने कबूतरी का जीवन हिंसक पशुओं के हाथ में न छोड़िए;

20 अपनी वाचा की लाज रख लीजिए,

21 दमित प्रजा को लज्जित होकर लौटना न पड़े;

22 परमेश्वर, उठ जाइए और अपने पक्ष की रक्षा कीजिए;

23 अपने विरोधियों के आक्रोश की अनदेखी न कीजिए,

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