1 याहवेह, मेरे परमेश्वर! मैं आपके ही आश्रय में आया हूं;
2 अन्यथा वे मेरे प्राण को सिंह की नाई फाड़कर टुकड़े-टुकड़े कर डालेंगे,
3 याहवेह, मेरे परमेश्वर, यदि मैंने वह किया है, जैसा वे कह रहे हैं,
4 यदि मैंने उसकी बुराई की है, जिसके साथ मेरे शान्तिपूर्ण संबंध थे,
5 तो शत्रु मेरा पीछा करे और मुझे पकड़ ले;
6 याहवेह, कोप में उठिए;
7 आपके चारों ओर विश्व के समस्त राष्ट्र एकत्र हों
8 याहवेह ही राष्ट्रों के न्यायाध्यक्ष हैं.
9 दुष्ट के दुष्कर्म समाप्त हो जाएं
10 परमेश्वर मेरी सुरक्षा की ढाल हैं,
11 परमेश्वर युक्त न्यायाध्यक्ष हैं, ऐसे परमेश्वर,
12 यदि मनुष्य पश्चात्ताप न करे,
13 परमेश्वर ने अपने घातक शस्त्र तैयार कर लिए हैं;
14 दुष्ट जन विनाश की योजनाओं को अपने गर्भ में धारण किए हुए हैं,
15 उसने भूमि खोदी और गड्ढा बनाया और
16 उसकी विनाशक युक्तियां लौटकर उसी के सिर पर आ पड़ेंगी;
17 मैं याहवेह को उनके धर्म के अनुसार धन्यवाद दूंगा;