Salmos 4

HINCV

1 हे मेरे धर्ममय परमेश्वर,

2 मनुष्यो! कब तक तुम मेरा अपमान करते रहोगे?

3 यह स्मरण रखो कि याहवेह ने अपने भक्त को अपने निमित्त अलग कर रखा है;

4 श्रद्धा में पाप का परित्याग कर दो;

5 व्यवस्था द्वारा निर्धारित बलि अर्पण करो

6 अनेक हैं, जो कहते हैं, “कौन है, जो हमें यह दर्शाएगा कि क्या है उपयुक्त और क्या है भला?”

7 जिन्हें अन्‍न और दाखमधु की बड़ी उपज प्राप्‍त हुई है,

8 मैं शांतिपूर्वक लेटूंगा और सो जाऊंगा,

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