1 याहवेह, आप उनसे न्याय-विन्याय करें, जो मुझसे न्याय-विन्याय कर रहे हैं;
2 ढाल और कवच के साथ;
3 उनके विरुद्ध, जो मेरा पीछा कर रहे हैं,
4 वे, जो मेरे प्राणों के प्यासे हैं,
5 जब याहवेह का दूत उनका पीछा करे,
6 उनका मार्ग ऐसा हो जाए, जिस पर अंधकार और फिसलन है.
7 उन्होंने अकारण ही मेरे लिए जाल बिछाया
8 उनका विनाश उन पर अचानक ही आ पड़े,
9 तब याहवेह में मेरा प्राण उल्लसित होगा
10 मेरी हड्डियां तक कह उठेंगी,
11 क्रूर साक्ष्य मेरे विरुद्ध उठ खड़े हुए हैं;
12 वे मेरे उपकार का प्रतिफल अपकार में दे रहे हैं,
13 जब वे दुःखी थे, मैंने सहानुभूति में शोक-वस्त्र धारण किए,
14 मैं इस भाव में विलाप करता चला गया
15 किंतु यहां जब मैं ठोकर खाकर गिर पड़ा हूं, वे एकत्र हो आनंद मना रहे हैं;
16 जब वे नास्तिक जैसे मेरा उपहास कर रहे थे, उसमें क्रूरता का समावेश था;
17 याहवेह, आप कब तक यह सब चुपचाप ही देखते रहेंगे?
18 महासभा के सामने मैं आपका आभार व्यक्त करूंगा;
19 जो अकारण ही मेरे शत्रु बन गए हैं,
20 उनके वार्तालाप शांति प्रेरक नहीं होते,
21 मुख फाड़कर वे मेरे विरुद्ध यह कहते हैं, “आहा! आहा!
22 याहवेह, सत्य आपकी दृष्टि में है; अब आप शांत न रहिए.
23 मेरी रक्षा के लिए उठिए!
24 याहवेह, मेरे परमेश्वर, अपनी सच्चाई में मुझे निर्दोष प्रमाणित कीजिए;
25 वे मन ही मन यह न कह सकें, “देखा, यही तो हम चाहते थे!”
26 वे सभी, जो मेरी दुखद स्थिति पर आनंदित हो रहे हैं,
27 वे सभी, जो मुझे दोष मुक्त हुआ देखने की कामना करते रहे,
28 मेरी जीभ सर्वदा आपकी धार्मिकता की घोषणा,