1 याहवेह, दुष्ट पुरुषों से मुझे उद्धार प्रदान कीजिए;
2 वे मन ही मन अनर्थ षड़्यंत्र रचते रहते हैं
3 उन्होंने अपनी जीभ सर्प सी तीखी बना रखी है;
4 याहवेह, दुष्टों से मेरी रक्षा कीजिए;
5 उन अहंकारियों ने मेरे पैरों के लिए एक फंदा बनाकर छिपा दिया है;
6 मैं याहवेह से कहता हूं, “आप ही मेरे परमेश्वर हैं.”
7 याहवेह, मेरे प्रभु, आप ही मेरे उद्धार का बल हैं,
8 दुष्टों की अभिलाषा पूर्ण न होने दें, याहवेह;
9 जिन्होंने इस समय मुझे घेरा हुआ है;
10 उनके ऊपर जलते हुए कोयलों की वृष्टि हो;
11 निंदक इस भूमि पर अपने पैर ही न जमा सकें;
12 मैं जानता हूं कि याहवेह दुखित का पक्ष अवश्य लेंगे
13 निश्चयतः धर्मी आपके नाम का आभार मानेंगे,