1 मूर्ख मन ही मन में कहते हैं,
2 स्वर्ग से याहवेह
3 सभी मनुष्य भटक गए हैं, सभी नैतिक रूप से भ्रष्ट हो चुके हैं;
4 मेरी प्रजा के ये भक्षक, ये दुष्ट पुरुष, क्या ऐसे निर्बुद्धि हैं?
5 वहां वे अत्यंत घबरा गये हैं,
6 तुम दुःखित को लज्जित करने की युक्ति कर रहे हो,
7 कैसा उत्तम होता यदि इस्राएल का उद्धार ज़ियोन से प्रगट होता!