1 “मेरे बचपन से वे मुझ पर घोर अत्याचार करते आए हैं,”
2 “मेरे बचपन से वे मुझ पर घोर अत्याचार करते आए हैं,
3 हल चलानेवालों ने मेरे पीठ पर हल चलाया है,
4 किंतु याहवेह युक्त है;
5 वे सभी, जिन्हें ज़ियोन से बैर है,
6 उनकी नियति भी वही हो, जो घर की छत पर उग आई घास की होती है,
7 किसी के हाथों में कुछ भी नहीं आता,
8 आते जाते पुरुष यह कभी न कह पाएं,