1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर उठाता—
2 मेरी सहायता का स्रोत तो याहवेह हैं,
3 वह तुम्हारा पैर फिसलने न देंगे;
4 निश्चयतः इस्राएल के रक्षक न तो झपकी लेंगे
5 याहवेह तुम्हें सुरक्षित रखते हैं—
6 न तो दिन के समय सूर्य से तुम्हारी कोई हानि होगी,
7 सभी प्रकार की बुराई से याहवेह तुम्हारी रक्षा करेंगे,
8 तुम्हारे आने जाने में याहवेह तुम्हें सुरक्षित रखेंगे,