1 मैंने याहवेह में आश्रय लिया है,
2 सावधान! दुष्ट ने अपना धनुष साध लिया है;
3 यदि आधार ही नष्ट हो जाए,
4 याहवेह अपने पवित्र मंदिर में हैं;
5 याहवेह की दृष्टि धर्मी एवं दुष्ट दोनों को परखती है,
6 दुष्टों पर वह फन्दों की वृष्टि करेंगे,
7 याहवेह युक्त हैं,