1 कैसा धन्य है वह पुरुष
2 इसके विपरीत उसका उल्लास याहवेह की व्यवस्था का पालन करने में है,
3 वह बहती जलधाराओं के तट पर लगाए गए उस वृक्ष के समान है,
4 किंतु दुष्ट ऐसे नहीं होते!
5 तब दुष्ट न्याय में टिक नहीं पाएंगे,
6 निश्चयतः याहवेह धर्मियों के आचरण को सुख समृद्धि से सम्पन्न करते हैं,