1 “जब इस्राएल बालक था, मैंने उससे प्रेम किया,
2 पर जितना ज्यादा उनको बुलाया गया,
3 वह मैं ही था, जिसने एफ्राईम को
4 मैंने मानवीय दया की डोरी,
5 “क्या वे मिस्र देश नहीं लौटेंगे
6 उनके शहरों में एक तलवार चमकेगी;
7 मेरे लोग मुझसे दूर जाने का ठान लिये हैं.
8 “हे एफ्राईम, मैं तुम्हें कैसे छोड़ सकता हूं?
9 मैं अपने भयंकर क्रोध के अनुसार नहीं करूंगा,
10 वे याहवेह के पीछे चलेंगे;
11 वे मिस्र देश से,
12 एफ्राईम ने मेरे चारों ओर झूठ का,