1 यहूदिया के राजा योथाम, आहाज़ तथा हिज़किय्याह के शासनकाल में मोरेशेथवासी मीकाह के पास याहवेह का यह वचन पहुंचा, जिसे उसने शमरिया और येरूशलेम के बारे में दर्शन में देखा.
2 हे लोगों, तुम सब सुनो,
3 देखो! याहवेह अपने निवास से निकलकर आ रहे हैं;
4 उनके पैरों के नीचे पर्वत पिघल जाते हैं
5 यह सब याकोब के अपराध,
6 “इसलिये मैं शमरिया को मैदान में खंडहर के ढेर सा कर दूंगा,
7 उसकी सब मूर्तियां टुकड़े-टुकड़े कर दी जाएंगी;
8 इसलिये मैं रोऊंगा और विलाप करूंगा;
9 क्योंकि शमरिया का घाव असाध्य है;
10 यह समाचार गाथ में न दिया जाए;
11 तुम जो शाफीर में रहते हो,
12 जो मारोथ में रहते हैं, वे दर्द से छटपटा रहे हैं,
13 तुम जो लाकीश में रहते हो,
14 इसलिये तुम्हें ही मोरेशेथ-गथ को
15 हे मारेशाह के रहनेवाले,
16 अपने प्यारे बच्चों के लिए शोक में