1 कैसी अकेली रह गई है,
2 रात्रि में बिलख-बिलखकर रोती रहती है,
3 यहूदिया के निर्वासन का कारण था
4 ज़ियोन के मार्ग विलाप के हैं,
5 आज उसके शत्रु ही अध्यक्ष बने बैठे हैं;
6 ज़ियोन की पुत्री से
7 अब इन पीड़ा के दिनों में, इन भटकाने के दिनों में
8 येरूशलेम ने घोर पाप किया है
9 उसकी गंदगी तो उसके वस्त्रों में थी;
10 शत्रु ने अपनी भुजाएं उसके समस्त गौरव की
11 उसके सभी नागरिक कराहते हुए
12 “तुम सभी के लिए, जो इस मार्ग से होकर निकल जाते हो, क्या यह तुम्हारे लिए कुछ भी नहीं?
13 “उच्च स्थान से याहवेह ने मेरी अस्थियों में अग्नि लगा दी,
14 “मेरे अपराध मुझ पर ही जूआ बना दिए गए हैं;
15 “प्रभु ने मेरे सभी शूर योद्धाओं को
16 “यही सब मेरे रोने का कारण हैं
17 ज़ियोन ने अपने हाथ फैलाए हैं,
18 “याहवेह सच्चा हैं,
19 “मैंने अपने प्रेमियों को पुकारा,
20 “याहवेह, मेरी ओर दृष्टि कीजिए!
21 “उन्होंने मेरी कराहट सुन ली है,
22 “उनकी समस्त दुष्कृति आपके समक्ष प्रकट हो जाए;