Jeremias 4

HINCV

1 याहवेह की यह वाणी है,

2 और तुम पूर्ण निष्ठा में, न्यायपूर्णता में तथा पूर्वजों में यह शपथ लो,

3 यहूदिया एवं येरूशलेम के निवासियों के लिए याहवेह का आदेश है:

4 यहूदिया तथा येरूशलेम के वासियो,

5 “यहूदिया में प्रचार करो और येरूशलेम में यह वाणी कहो:

6 ज़ियोन की ओर झंडा ऊंचा किया जाए!

7 झाड़ियों में छिपा सिंह बाहर निकल आया है;

8 तब साधारण वस्त्र धारण करो,

9 “उस दिन ऐसा होगा,” यह याहवेह की वाणी है,

10 इस पर मैं कह उठा, “प्रभु याहवेह! आपने तो येरूशलेम के निवासियों को यह आश्वासन देते हुए पूर्णतः धोखे में रखा हुआ है, ‘तुम शांत एवं सुरक्षित रहोगे,’ जबकि उनके गर्दन पर तलवार रखी हुई है!”

13 देखो! वह घुमड़ते मेघों के सदृश बढ़ा चला आ रहा है,

14 येरूशलेम, अपने दुष्ट हृदय को धोकर साफ़ करो, कि तुम सुरक्षित रह सको.

15 दान से एक स्वर कह रहा है,

16 “इसी समय राष्ट्रों में सूचना प्रसारित की जाए,

17 खेत के प्रहरियों सदृश वे अपना घेरा छोटा करते जा रहे हैं,

18 “तुम्हारे आचरण एवं तुम्हारे कार्यों के

19 मेरे प्राण, ओ मेरे प्राण!

20 विध्वंस पर विध्वंस की वाणी की गई है;

21 मैं कब तक झंडा-पताका को देखता रहूं

22 “क्योंकि निर्बुद्धि है मेरी प्रजा;

23 मैंने पृथ्वी पर दृष्टि की,

24 मैंने पर्वतों की ओर दृष्टि की,

25 मैंने ध्यान दिया, कि वहां कोई मनुष्य नहीं था;

26 मैंने देखा, और यह पाया कि फलदायी देश अब निर्जन प्रदेश हो चुका था;

27 यह याहवेह की वाणी है:

28 इसके लिए पृथ्वी विलाप करेगी

29 घुड़सवार एवं धनुर्धारियों की ध्वनि सुन हर एक

30 और तुम जो निर्जन हो, अब क्या करोगी?

31 मुझे ऐसी कराहट सुनाई दी मानो कोई प्रसूता की कराहट हो ऐसी वेदना का स्वर,

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