1 याहवेह, जब भी मैं आपके समक्ष अपना मुकदमा प्रस्तुत करता हूं,
2 आपने उन्हें रोपित किया है, अब तो उन्होंने जड़ भी पकड़ ली है;
3 किंतु याहवेह, आप मुझे जानते हैं;
4 हमारा देश और कितने दिन विलाप करता रहेगा
5 “यदि तुम धावकों के साथ दौड़ रहे थे
6 क्योंकि यहां तक कि तुम्हारे भाई-बंधुओं तथा तुम्हारे पिता के ही परिवार ने—
7 “मैंने अपने परिवार का परित्याग कर दिया है,
8 मेरे लिए तो अब मेरा यह निज भाग
9 क्या मेरे लिए यह निज भाग
10 अनेक हैं वे चरवाहे जिन्होंने मेरा द्राक्षाउद्यान नष्ट कर दिया है,
11 इसे उजाड़ बना दिया गया है,
12 निर्जन प्रदेश में वनस्पतिहीन पहाड़ियों पर
13 उन्होंने रोपण तो किया गेहूं को किंतु उपज काटी कांटों की;
14 अपने बुरे पड़ोसियों के विषय में जिन्होंने मेरी प्रजा इस्राएल के इस निज भाग पर आक्रमण किया है, याहवेह का यह कहना है: “यह देख लेना, मैं उन्हें उनके देश में से अलग करने पर हूं और उनके मध्य से मैं यहूदाह के वंश को अलग कर दूंगा.
15 और तब जब मैं उन्हें अलग कर दूंगा, मैं उन पर पुनः अपनी करुणा प्रदर्शित करूंगा; तब मैं उनमें से हर एक को उसके इस निज भाग में लौटा ले आऊंगा; हर एक को उसके देश में लौटा लाऊंगा.
16 तब यदि वे मेरी प्रजा की नीतियां सीख लेंगे और बाल के जीवन की शपथ कहने के स्थान पर कहेंगे, ‘जीवित याहवेह की शपथ,’ तब वे मेरी प्रजा के मध्य ही समृद्ध होते चले जाएंगे.
17 किंतु यदि वे मेरे आदेश की अवहेलना करेंगे, तब मैं उस राष्ट्र को अलग कर दूंगा; अलग कर उसे नष्ट कर दूंगा,” यह याहवेह की वाणी है.