1 देखो, राजा धर्म से शासन करेंगे
2 सब मानो आंधी से छिपने
3 तब जो देखते हैं, उनकी आंख कमजोर न होगी,
4 उतावले लोगों के मन ज्ञान की बातें समझेंगे,
5 मूर्ख फिर उदार न कहलायेगा
6 क्योंकि एक मूर्ख मूढ़ता की बातें ही करता है,
7 दुष्ट गलत बात सोचता है,
8 किंतु सच्चा व्यक्ति तो अच्छा ही करता है,
9 हे आलसी स्त्रियों तुम जो निश्चिंत हो,
10 हे निश्चिंत पुत्रियो एक वर्ष
11 हे निश्चिंत स्त्रियो, कांपो;
12 अच्छे खेतों के लिए
13 क्योंकि मेरी प्रजा,
14 क्योंकि राजमहल छोड़ दिया जायेगा,
15 जब तक हम पर ऊपर से आत्मा न उंडेला जाए,
16 तब तक उस बंजर भूमि में याहवेह का न्याय रहेगा,
17 धार्मिकता का फल है शांति, उसका परिणाम चैन;
18 तब मेरे लोग शांति से,
19 और वन विनाश होगा
20 क्या ही धन्य हो तुम,