1 हाय उन पर जो गलत न्याय करते
2 कि वे कंगालों को न्याय से दूर कर दें
3 क्या करोगे तुम दंड और विनाश के दिन पर,
4 बंदियों के बीच चापलूसी और मरे हुओं के बीच छिपने के सिवा
5 “अश्शूर पर हाय,
6 मैं उसको एक श्रद्धाहीन जाति के विरुद्ध भेजूंगा,
7 किंतु फिर भी उसकी इच्छा यह नहीं
8 क्योंकि वह यह कहता है, ‘क्या मेरे सब हाकिम राजा नहीं?
9 क्या कलनो कर्कमीश व हामाथ अरपाद के
10 इसलिये कि मेरा हाथ मूर्तियों के राज्य में पहुंच गया है,
11 क्या मैं येरूशलेम और उसकी मूर्तियों के साथ वही करूंगा
12 तब अब ऐसा होगा जब प्रभु ज़ियोन पर्वत और येरूशलेम में अपना सब काम पूरा कर चुके होंगे, तब वे अश्शूर के राजा को उसके विचारों और घमंड को तोड़ देंगे.
13 क्योंकि उनका यह मानना था:
14 देश के लोगों की धन-संपत्ति इस प्रकार कब्जे में की,
15 क्या कुल्हाड़ी अपनी प्रशंसा करेगी,
16 तब सर्वशक्तिमान याहवेह,
17 इस्राएल की ज्योति आग
18 वे उसके वन और फलदायक उद्यान के वैभव को ऐसे नष्ट कर देंगे, जैसे एक रोगी की देह
19 उसके वन में शेष रह गए वृक्षों की संख्या इतनी अल्प हो जाएगी
20 उस दिन इस्राएल के बचे हुए लोग,
21 याकोब में से बचे हुए लोग
22 क्योंकि हे इस्राएल, चाहे तुम्हारी प्रजा समुद्र के बालू के समान भी हो,
23 क्योंकि विनाश करने का निर्णय
24 इसलिये प्रभु, सेनाओं के याहवेह यों कहते हैं:
25 क्योंकि कुछ ही समय में तुम पर मेरा गुस्सा शांत हो जाएगा
26 सर्वशक्तिमान याहवेह उनको चाबुक से ऐसा मारेंगे,
27 उस दिन उनका बोझ तुम्हारे कंधों से हट जाएगा,
28 उन्होंने अय्याथ पर हमला कर दिया है;
29 वे घाटी पार करके,
30 हे गल्लीम की पुत्री, ऊंचे स्वर में चिल्लाओ!
31 मदमेनाह भाग गया है;
32 वे आज नोब में रुकेंगे;
33 देखो, प्रभु, सर्वशक्तिमान याहवेह,
34 वे घने वन के झुरमुटों को काट डालेंगे;