1 याहवेह का वचन मेरे पास आया:
2 “हे मनुष्य के पुत्र, सोर के शासक से कहो, ‘परम प्रधान याहवेह का यह कहना है:
3 क्या तुम दानिएल से ज्यादा बुद्धिमान हो?
4 अपनी बुद्धि और समझ से
5 व्यापार में अपनी निपुणता के द्वारा,
6 “ ‘इसलिये परम प्रधान याहवेह का यह कहना है:
7 इसलिये मैं तुम पर विदेशियों से चढ़ाई कराऊंगा,
8 वे तुम्हें नीचे गड्ढे में ले आएंगे,
9 जो तुम्हें मार डालते हैं, उनके सामने
10 तुम विदेशियों के हाथ
11 याहवेह का वचन मेरे पास आया:
12 “हे मनुष्य के पुत्र, सोर के राजा के बारे में एक विलापगीत लो और उससे कहो: ‘परम प्रधान याहवेह का यह कहना है:
13 तुम परमेश्वर के बगीचा,
14 एक अभिभावक करूब के रूप में तुम्हारा राजतिलक हुआ था,
15 अपनी सृष्टि के दिन से ही तुम अपने आचार
16 अपने व्यापार के फैले होने के कारण
17 अपनी सुंदरता के कारण
18 अपने बहुत पाप और बेईमानी के व्यापार से
19 सब जाति के लोग जो तुम्हें जानते थे,
20 याहवेह का वचन मेरे पास आया:
21 “हे मनुष्य के पुत्र, सीदोन की ओर अपना मुंह करके उसके विरुद्ध भविष्यवाणी करो
22 और कहो: ‘परम प्रधान याहवेह का यह कहना है:
23 मैं तुम्हारे बीच महामारी फैलाऊंगा
24 “ ‘तब इस्राएली लोगों के ऐसे पड़ोसी देश नहीं होंगे, जो पीड़ादायक कंटीली झाड़ी और तेज चुभनेवाले कांटे जैसे हों. तब वे जानेंगे कि मैं परम प्रधान याहवेह हूं.
25 “ ‘परम प्रधान याहवेह का यह कहना है: जब मैं इस्राएल के लोगों को उन जाति के लोगों में से इकट्ठा करूंगा, जिनके बीच वे बिखर गये हैं, तो मैं उनके द्वारा उन जाति के लोगों की दृष्टि में पवित्र ठहरूंगा. तब वे अपने स्वयं के देश में रहेंगे, जिसे मैंने अपने सेवक याकोब को दिया था.
26 वे वहां सुरक्षित रहेंगे और घर बनाएंगे और अंगूर की बारी लगाएंगे; वे सुरक्षित रहेंगे जब मैं उनके उन सब पड़ोसी देशों को दंड दूंगा, जो उनसे शत्रुता रखते थे. तब वे जानेंगे कि मैं उनका परमेश्वर, याहवेह हूं.’ ”