1 सम्मानित होना इत्र से कहीं ज्यादा बेहतर है,
2 शोक के घर में जाना
3 शोक करना हंसने से अच्छा है,
4 बुद्धिमान का हृदय तो शोक करनेवालों के घर में होता है,
5 एक बुद्धिमान की फटकार सुनना
6 मूर्खों की हंसी किसी
7 अत्याचार बुद्धिमान को मूर्ख बना देता है
8 किसी काम का अंत उसकी शुरुआत से बेहतर है,
9 क्रोध करने में जल्दबाजी न करना,
10 तुम्हारा यह कहना न हो, “बीता हुआ समय आज से बेहतर क्यों था?”
11 बुद्धि के साथ मीरास पाना सबसे अच्छा है,
12 बुद्धि की सुरक्षा
13 परमेश्वर के कामों पर मनन करो:
14 भरपूरी के दिनों में तो खुश रहो;
15 अपने बेकार के जीवन में मैंने हर एक चीज़ देखी:
16 बहुत धर्मी न होना,
17 बहुत दुष्ट न होना,
18 अच्छा होगा कि तुम एक चीज़ पर अधिकार कर लो
19 बुद्धिमान के लिए बुद्धि नगर के
20 पृथ्वी पर एक व्यक्ति भी ऐसा धर्मी नहीं है,
21 लोगों की बातों पर ध्यान न देना,
22 क्योंकि तुम्हें मालूम होगा
23 इन सभी कामों की छानबीन मैंने बुद्धि द्वारा की और मैंने कहा,
24 जो कुछ है वह हमारी बुद्धि से परे है. यह गहरा है, बहुत ही गहरा.
25 मैंने अपने हृदय से यह मालूम करने की कोशिश की
26 मुझे यह मालूम हुआ कि एक स्त्री जिसका हृदय घात लगाए रहता है,
27 दार्शनिक कहता है, “देखो!” मुझे यह मालूम हुआ:
28 जिसकी मैं अब तक खोज कर रहा हूं
29 मगर मुझे यह ज़रूर मालूम हुआ: