1 जवानी में अपने बनानेवाले को याद रख:
2 इससे पहले कि सूरज, चंद्रमा
3 उस दिन पहरेदार कांपने लगेंगे,
4 चक्की की आवाज धीमी होने के कारण
5 लोग ऊंची जगहों से डरेंगे
6 याद करो उनको इससे पहले कि चांदी की डोर तोड़ी जाए,
7 धूल जैसी थी वैसी ही भूमि में लौट जाएगी,
8 “बेकार! ही बेकार है!” दार्शनिक कहता है,
9 बुद्धिमान होने के साथ साथ दार्शनिक ने लोगों को ज्ञान भी सिखाया उसने खोजबीन की और बहुत से नीतिवचन को इकट्ठा किया.
10 दार्शनिक ने मनभावने शब्दों की खोज की और सच्चाई की बातों को लिखा.
11 बुद्धिमानों की बातें छड़ी के समान होती हैं तथा शिक्षकों की बातें अच्छे से ठोकी गई कीलों के समान; वे एक ही चरवाहे द्वारा दी गईं हैं.
12 पुत्र! इनके अलावा दूसरी शिक्षाओं के बारे में चौकस रहना;
13 इसलिये इस बात का अंत यही है:
14 क्योंकि परमेश्वर हर एक काम को,