1 कितनी सुंदर हो तुम मेरी प्रिया!
2 तुम्हारे दांत अभी-अभी ऊन कतरे हुए भेड़ों के समान हैं,
3 तुम्हारे ओंठ लाल रंग की डोरी के समान हैं;
4 दावीद द्वारा बनाए गए मीनारों के समान है तुम्हारी गर्दन,
5 तुम्हारी दोनों छातियां हिरणी के दो बच्चों के समान हैं,
6 शाम होने तक
7 मेरी प्रियतमा, तुम सर्वांग सुंदरी हो;
8 मेरी दुल्हिन, मेरे साथ लबानोन से आ जाओ,
9 मेरी बहन, मेरी दुल्हिन, तुमने तो मेरी हृदय गति तेज कर दी है;
10 मेरी बहन, मेरी दुल्हिन, कैसा मनोहर है तुम्हारा प्रेम!
11 मेरी दुल्हिन, तुम्हारे ओंठ मधु टपकाते हैं;
12 मेरी बहन, मेरी दुल्हिन एक गुप्त निजी बगीचा है;
13 तुम तो अनार के पेड़ों की बारी हो, जिसमें सबसे अच्छे फल लगे हुए हैं
14 जटामांसी एवं केसर,
15 तुम तो बगीचे के बीच का सोता हो,
16 उत्तरी वायु, जागो,