Salmos 39

HIN2017

1 मैंने कहा, “मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूँगा,

2 मैं मौन धारण कर गूँगा बन गया,

3 मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर जल रहा था।

4 “हे यहोवा, ऐसा कर कि मेरा अन्त

5 देख, तूने मेरी आयु बालिश्त भर की रखी है,

6 सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है;

7 “अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूँ?

8 मुझे मेरे सब अपराधों के बन्धन से छुड़ा ले।

9 मैं गूँगा बन गया और मुँह न खोला;

10 तूने जो विपत्ति मुझ पर डाली है

11 जब तू मनुष्य को अधर्म के कारण

12 “हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, और मेरी दुहाई पर कान लगा;

13 आह! इससे पहले कि मैं यहाँ से चला जाऊँ

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