Salmos 27

HIN2017

1 यहोवा मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है;

2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से

3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले,

4 एक वर मैंने यहोवा से माँगा है,

5 क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने

6 अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊँचा होगा;

7 हे यहोवा, मेरा शब्द सुन, मैं पुकारता हूँ,

8 तूने कहा है, “मेरे दर्शन के खोजी हो।”

9 अपना मुख मुझसे न छिपा।

10 मेरे माता-पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है,

11 हे यहोवा, अपना मार्ग मुझे सिखा,

12 मुझ को मेरे सतानेवालों की इच्छा पर न छोड़,

13 यदि मुझे विश्वास न होता कि जीवितों की

14 यहोवा की बाट जोहता रह;

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