1 यहोवा की स्तुति करो।
2 मैं जीवन भर यहोवा की स्तुति करता रहूँगा;
3 तुम प्रधानों पर भरोसा न रखना,
4 उसका भी प्राण निकलेगा, वह भी मिट्टी में मिल जाएगा;
5 क्या ही धन्य वह है,
6 वह आकाश और पृथ्वी और समुद्र
7 वह पिसे हुओं का न्याय चुकाता है;
8 यहोवा अंधों को आँखें देता है।
9 यहोवा परदेशियों की रक्षा करता है;
10 हे सिय्योन, यहोवा सदा के लिये,