1 मैं यहोवा की दुहाई देता,
2 मैं अपने शोक की बातें उससे खोलकर कहता,
3 जब मेरी आत्मा मेरे भीतर से व्याकुल हो रही थी,
4 मैंने दाहिनी ओर देखा, परन्तु कोई मुझे नहीं देखता।
5 हे यहोवा, मैंने तेरी दुहाई दी है;
6 मेरी चिल्लाहट को ध्यान देकर सुन,
7 मुझ को बन्दीगृह से निकाल कि मैं तेरे नाम का धन्यवाद करूँ!