1 तब मैंने ऊपर निगाह उठाई और मैंने एक व्यक्ति को नापने की रस्सी को लिये हुए देखा।
2 मैंने उससे पूछा, “तुम कहाँ जा रहे हो”
3 तब वह दूत, जो मुझसे बातें कर रहा था, चला गया और उससे बातें करने को दूसरा दूत बाहर गया।
4 उसने उससे कहा, “दौड़कर जाओ और उस युवक से कहो कि यरूशलम इतना विशाल है कि उसे नापा नहीं जा सकता। उससे यह कहो,
5 यहोवा कहता है,
6 “जल्दी करो! उत्तर देश से भाग निकलो!
7 सिय्योन के लोगों, तुम बाबुल में बन्दी हो।
8 सर्वशक्तिमान यहोवा ने मेरे बारे में यह कहा, “उसने मुझे भेजा है, जिन्होंने उन राष्ट्रों में युद्ध में तुमसे चीज़ें छीनीं!
9 और मैं उन लोगों के विरूद्ध अपना हाथ उठाऊँगा
10 यहोवा कहता है,
11 उस समय अनेक राष्ट्रों के लोग
12 यहोवा यरूशलेम को फिर से अपना विशेष नगर चुनेगा
13 सभी व्यक्ति, शान्त हो जाओ!