1 हे यहोवा, तू ही एक परमेश्वर है जो लोगों को दण्ड देता है।
2 तू ही समूची धरती का न्यायकर्ता है।
3 हे यहोवा, दुष्ट जन कब तक मजे मारते रहेंगे
4 वे अपराधी कब तक डींग मारते रहेंगे
5 हे यहोवा, वे लोग तेरे भक्तों को दु:ख देते हैं।
6 वे दुष्ट लोग विधवाओं और उन अतिथियों की जो उनके देश में ठहरे हैं, हत्या करते हैं।
7 वे कहा करते हैं, यहोवा उनको बुरे काम करते हुए देख नहीं सकता।
8 अरे ओ दुष्ट जनों तुम बुद्धिहीन हो।
9 परमेश्वर ने हमारे कान बनाएँ हैं, और निश्चय ही उसके भी कान होंगे।
10 परमेश्वर उन लोगों को अनुशासित करेगा।
11 सो जिन बातों को लोग सोच रहे हैं, परमेश्वर जानता है,
12 वह मनुष्य जिसको यहोवा सुधारता, अति प्रसन्न होगा।
13 हे परमेश्वर, जब उस जन पर दु:ख आयेंगे तब तू उस जन को शांत होने में सहायक होगा।
14 यहोवा निज भक्तों को कभी नहीं त्यागेगा।
15 न्याय लौटेगा और अपने साथ निष्पक्षता लायेगा,
16 मुझको दुष्टों के विरूद्ध युद्ध करने में किसी व्यक्ति ने सहारा नहीं दिया।
17 यदि यहोवा मेरा सहायक नहीं होता,
18 मुझको पता है मैं गिरने को था,
19 मैं बहुत चिंतित और व्याकुल था,
20 हे यहोवा, तू कुटिल न्यायाधीशों की सहायता नहीं करता।
21 वे न्यायाधीश सज्जनों पर प्रहार करते हैं।
22 किन्तु यहोवा ऊँचे पर्वत पर मेरा सुरक्षास्थल है,
23 परमेश्वर उन न्यायाधीशों को उनके बुरे कामों का दण्ड देगा।