Salmos 83

HIN2010

1 हे परमेश्वर, तू मौन मत रह!

2 हे परमेश्वर, तेरे शत्रु तेरे विरोध में कुचक्र रच रहे हैं।

3 वे तेरे भक्तों के विरूद्ध षड़यन्त्र रचते हैं।

4 वे शत्रु कह रहे हैं, “आओ, हम उन लोगों को पूरी तरह मिटा डाले,

5 हे परमेश्वर, वे सभी लोग तेरे विरोध में और तेरे उस वाचा के विरोध में जो तूने हमसे किया है,

8 यहाँ तक कि अश्शूरी भी उन लोगों से मिल गये।

9 हे परमेश्वर, तू शत्रु वैसे हरा

10 तूने उन्हें एन्दोर में हराया।

11 हे परमेश्वर, तू शत्रुओं के सेनापति को वैसे पराजित कर जैसे तूने ओरेब और जायेब के साथ किया था,

12 हे परमेश्वर, वे लोग हमको धरती छोड़ने के लिये दबाना चाहते थे!

13 उन लोगों को तू उखड़े हुए पौधा सा बना जिसको पवन उड़ा ले जाती है।

14 शत्रु को ऐसे नष्ट कर जैसे वन को आग नष्ट कर देती है,

15 हे परमेश्वर, उन लोगों का पीछा कर भगा दे, जैसे आँधी से धूल उड़ जाती है।

16 हे परमेश्वर, उनको ऐसा पाठ पढ़ा दे, कि उनको अहसास हो जाये कि वे सचमुच दुर्बल हैं।

17 हे परमेश्वर, उन लोगों को भयभीत कर दे

18 वे लोग तभी जानेंगे कि तू परमेश्वर है।

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