1 सचमुच, इस्राएल के प्रति परमेश्वर भला है।
2 मैं तो लगभग फिसल गया था
3 जब मैंने देखा कि पापी सफल हो रहे हैं
4 वे लोग स्वस्थ हैं
5 वे अभिमानी लोग पीड़ायें नहीं उठाते है।
6 इसलिए वे अहंकार से भरे रहते हैं।
7 वे लोग ऐसे है कि यदि कोई वस्तु देखते हैं और उनको पसन्द आ जाती है, तो उसे बढ़कर झपट लेते हैं।
8 वे दूसरों के बारें में क्रूर बातें और बुरी बुरी बातें कहते है। वे अहंकारी और हठी है।
9 अभिमानी मनुष्य सोचते हैं वे देवता हैं!
10 यहाँ तक कि परमेश्वर के जन, उन दुष्टों की ओर मुड़ते और जैसा वे कहते है,
11 वे दुष्ट जन कहते हैं, “हमारे उन कर्मो को परमेश्वर नहीं जानता!
12 वे मनुष्य अभिमान और कुटिल हैं,
13 सो मैं अपना मन पवित्र क्यों बनाता रहूँ
14 हे परमेश्वर, मैं सारे ही दिन दु:ख भोगा करता हूँ।
15 हे परमेश्वर, मैं ये बातें दूसरो को बताना चाहता था।
16 इन बातों को समझने का, मैंने जतन किया
17 जब तक मैं तेरे मन्दिर में नहीं गया।
18 हे परमेश्वर, सचमुच तूने उन लोगों को भयंकर परिस्थिति में रखा है।
19 सहसा उन पर विपत्ति पड़ सकती है,
20 हे यहोवा, वे मनुष्य ऐसे होंगे
23 वह सब कुछ मेरे पास है, जिसकी मुझे अपेक्षा है। मैं तेरे साथ हरदम हूँ।
24 हे परमेश्वर, तू मुझे मार्ग दिखलाता, और मुझे सम्मति देता है।
25 हे परमेश्वर, स्वर्ग में बस तू ही मेरा है,
26 चाहे मेरा मन टूट जाये और मेरी काया नष्ट हो जाये
27 परमेश्वर, जो लोग तुझको त्यागते हैं, वे नष्ट हो जाते है।
28 किन्तु, मैं परमेश्वर के निकट आया।