1 हे परमेश्वर, मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तुझ पर निर्भर हूँ।
2 मेरा यहोवा से निवेदन है, “यहोवा,
3 यहोवा अपने लोगों की धरती
4 किन्तु जो अन्य देवताओं के पीछे उन की पूजा के लिये भागते हैं, वे दु:ख उठायेंगे।
5 नहीं, बस मेरा भाग यहोवा में है।
6 मेरा भाग अति अद्भुत है।
7 मैं यहोवा के गुण गात हूँ क्योंकि उसने मुझे ज्ञान दिया।
8 मैं यहोवा को सदैव अपने सम्मुख रखता हूँ,
9 इसी से मेरा मन और मेरी आत्मा अति आनन्दित होगी
10 क्योंकि, यहोवा, तू मेरा प्राण कभी भी मृत्यु के लोक में न तजेगा।
11 तू मुझे जीवन की नेक राह दिखायेगा।