1 हे यहोवा, मैं तुझको सहायता पाने के लिये पुकारता हूँ।
2 हे यहोवा, मेरी विनती तेरे लिये जलती धूप के उपहार सी हो
3 हे यहोवा, मेरी वाणी पर मेरा काबू हो।
4 मुझको बुरी बात मत करने दे।
5 सज्जन मेरा सुधार कर सकता है।
6 उनके राजाओं को दण्डित होने दे
7 लोग खेत को खोद कर जोता करते हैं और मिट्टी को इधर—उधर बिखेर देते हैं।
8 हे यहोवा, मेरे स्वामी, सहारा पाने को मेरी दृष्टि तुझ पर लगी है।
9 मुझको दुष्टों के फँदों में मत पड़ने दे।
10 वे दुष्ट स्वयं अपने जालों में फँस जायें