Salmos 132

HIN2010

1 हे यहोवा, जैसे दाऊद ने यातनाएँ भोगी थी, उसको याद कर।

2 किन्तु दाऊद ने यहोवा की एक मन्नत मानी थी।

3 दाऊद ने कहा था: “मैं अपने घर में तब तक न जाऊँगा,

4 न ही सोऊँगा।

5 इसमें से मैं कोई बात भी नहीं करूँगा जब तक मैं यहोवा के लिए एक भवन न प्राप्त कर लूँ।

6 एप्राता में हमने इसके विषय में सुना,

7 आओ, पवित्र तम्बू में चलो।

8 हे यहोवा, तू अपनी विश्राम की जगह से उठ बैठ,

9 हे यहोवा, तेरे याजक धार्मिकता धारण किये रहते हैं।

10 तू अपने चुने हुये राजा को

11 यहोवा ने दाऊद को एक वचन दिया है कि दाऊद के प्रति वह सच्चा रहेगा।

12 यहोवा ने कहा था, “यदि तेरी संतानें मेरी वाचा पर और मैंने उन्हें जो शिक्षाएं सिखाई उन पर चलेंगे तो

13 अपने मन्दिर की जगह के लिए यहोवा ने सिय्योन को चुना था।

14 यहोवा ने कहा था, “यह मेरा स्थान सदा सदा के लिये होगा।

15 भरपूर भोजन से मैं इस नगर को आशीर्वाद दूँगा,

16 याजकोंको मैं उद्धार का वस्त्र पहनाऊँगा,

17 इस स्थान पर मैं दाऊद को सुदृढ करुँगा।

18 मैं दाऊद के शत्रुओं को लज्जा से ढक दूँगा

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