Provérbios 31

HIN2010

1 ये सूक्तियाँ राजा लमूएल की, जिन्हें उसे उसकी माता ने सिखाया था।

2 तू मेरा पुत्र है वह पुत्र जो मुझ को प्यारा है। जिसके पाने को मैंने मन्नत मानी थी।

3 तू व्यर्थ अपनी शक्ति स्त्रियों पर मत व्यय करो स्त्री ही राजाओं का विनाश करती हैं। इसलिये तू उन पर अपना क्षय मत कर।

4 हे लमूएल! राजा को मधुपान शोभा नहीं देता, और न ही यह कि शासक को यवसुरा ललचाये।

5 नहीं तो, वे मदिरा का बहुत अधिक पान करके, विधान की व्यवस्था को भूल जायेगें और वे सारे दीन दलितों के अधिकारों को छीन लेंगे।

6 वे जो मिटे जा रहे हैं उन्हें यवसुरा, मदिरा उनको दे जिन पर दारूण दुःख पड़ा हो।

7 उनको पीने दे और उन्हें उनके अभावों को भूलने दे। उनका वह दारूण दुःख उन्हें नहीं याद रहे।

8 तू बोल उनके लिये जो कभी भी अपने लिये बोल नहीं पाते हैं; और उन सब के, अधिकारों के लिये बोल जो अभागे हैं।

9 तू डट करके खड़ा रह उन बातों के हेतू जिनको तू जानता है कि वे उचित, न्यायपूर्ण, और बिना पक्ष—पात के सबका न्याय कर। तू गरीब जन के अधिकारों की रक्षा कर और उन लोगों के जिनको तेरी अपेक्षा हो।

10 गुणवंती पत्नी कौन पा सकता है

11 जिसका पति उसका विश्वास कर सकता है।

12 सद्पत्नी पति के संग उत्तम व्यवहार करती।

13 वह सदा ऊनी और सूती कपड़े बुनाने में व्यस्त रहती।

14 वह जलयान जो दूर देश से आता है

15 तड़के उठाकर वह भोजन पकाती है।

16 वह देखकर एवं परख कर खेत मोल लेती है

17 वह बड़ा श्रम करती है।

18 जब भी वह अपनी बनायी वस्तु बेचती है, तो लाभ ही कमाती है।

19 वह सूत कातती

20 वह सदा ही दीन—दुःखी को दान देती है,

21 जब शीत पड़ती तो वह अपने परिवार हेतु चिंतित नहीं होती है।

22 वह चादर बनाती है और गद्दी पर फैलाती है।

23 लोग उसके पति का आदर करते हैं

24 वह अति उत्तम व्यापारी बनती है।

25 वह शक्तिशाली है,

26 जब वह बोलती है, वह विवेकपूर्ण रहती है।

27 वह कभी भी आलस नहीं करती है

28 उसके बच्चे खड़े होते और उसे आदर देते हैं।

29 उसका पति कहता है, “बहुत सी स्त्रियाँ होती हैं।

30 मिथ्या आकर्षण और सुन्दरता दो पल की है,

31 उसे वह प्रतिफल मिलना चाहिये जिसके वह योग्य है, और जो काम उसने किये हैं,

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