Jeremias 30

HIN2010

1 यह सन्देश यहोवा का है जो यिर्मयाह को मिले।

2 इस्राएल के लोगों के परमेश्वर यहोवा ने यह कहा, “यिर्मयाह, मैंने जो सन्देश दिये है, उन्हें एक पुस्तक में लिख डालो। इस पुस्तक को अपने लिये लिखो।”

3 यह सन्देश यहोवा का है। “यह करो, क्योंकि वे दिन आएंगे जब मैं अपने लोगों इस्राएल और यहूदा को देश निकाले से वापस लाऊँगा।” यह सन्देश यहोवा का है। “मैं उन लोगों को उस देश में वापस लाऊँगा जिसे मैंने उनके पूर्वजों को दिया था। तब मेरे लोग उस देश को फिर अपना बनायेंगे।”

4 यहोवा ने यह सन्देश इस्राएल और यहूदा के लोगों के बारे में दिया।

5 यहोवा ने जो कहा, वह यह है:

6 “यह प्रश्न पूछो इस पर विचार करो:

7 “यह याकूब के लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण समय है।

8 यह सन्देश सर्वशक्तिमान यहोवा का है: “उस समय, मैं इस्राएल और यहूदा के लोगों की गर्दन से जुवे को तोड़ डालूँगा और तुम्हें जकड़ने वाली रस्सियों को मैं तोड़ दूँगा। विदेशों के लोग मेरे लोगों को फिर कभी दास होने के लिये विवश नहीं करेंगे।

9 इस्राएल और यहूदा के लोग अन्य देशों की भी सेवा नहीं करेंगे। नहीं, वे तो अपने परमेश्वर यहोवा की सेवा करेंगे और वे अपने राजा दाऊद की सेवा करेंगे। मैं उस राजा को उनके पास भेजूँगा।

10 “अत: मेरे सेवक याकूब डरो नहीं।”

11 इस्राएल और यहूदा के लोगों, मैं तुम्हारे साथ हूँ।”

12 यहोवा कहता है, “इस्राएल और यहूदा के तुम लोगों को एक घाव

13 तुम्हारे घावों को ठीक करने वाला कोई व्यक्ति नहीं है।

14 तुम अनेक राष्ट्रों के मित्र बने हो,

15 इस्राएल और यहूदा तुम अपने घाव के बारे में क्यों चिल्ला रहे हो तुम्हारा घाव कष्टकर है

16 उन राष्ट्रों ने तुम्हें नष्ट किया।

17 मैं तुम्हारे स्वास्थ को लौटाऊँगा और मैं तुम्हारे घावों को भरूँगा।”

18 यहोवा कहता है:

19 उन स्थानों पर लोग स्तुतिगान करेंगे।

20 याकूब का परिवार प्राचीन काल के परिवारों सा होगा।

21 उन्हीं में से एक उनका अगुवा होगा।

22 तुम मेरे लोग होगे

23 यहोवा बहुत क्रोधित था।

24 यहोवा तब तक क्रोधित रहेगा

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