1 यहोवा का सन्देश यिर्मयाह को मिला। यहोवा का सन्देश यह था:
2 “यिर्मयाह, जाओ और यरूशलेम के लोगों को सन्देश दो। उनसे कहो:
3 इस्राएल के लोग यहोवा को एक पवित्र भेंट थे।
4 याकूब के परिवार, यहोवा का सन्देश सुनो।
5 जो यहोवा कहता है, वह यह है:
6 तुम्हारे पूर्वजों ने यह नहीं कहा,
7 “यहोवा कहता है, मैं तुम्हें अनेक अच्छी चीज़ों से भरे उत्तम देश में लाया।
8 “याजकों ने नहीं पूछा, ‘यहोवा कहाँ हैं’ व्यवस्था को जाननेवाले लोगों ने मुझको जानना नहीं चाहा।
9 यहोवा कहता है, “अत: मैं अब तुम्हें फिर दोषी करार दूँगा,
10 समुद्र पार कित्तियों के द्वीपों को जाओ
11 क्या किसी राष्ट्र के लोगों ने कभी अपने पुराने देवताओं को नये देवता से बदला है नहीं!
12 “आकाश, जो हुआ है उससे अपने हृदय को आघात पहुँचने दो!
13 “मेरे लोगों ने दो पाप किये हैं।
14 “क्या इस्राएल के लोग दास हो गए हैं
15 जवान सिंह (शत्रु) इस्राएल राष्ट्र पर दहाड़ते हैं, गुरते हैं।
16 नोप और तहपन्हेस नगरों के लोगों ने तुम्हारे सिर के शीर्ष को कुचल दिया है।
17 यह परेशानी तुम्हारे अपने दोष के कारण है।
18 यहूदा के लोगों, इसके बारे में सोचो:
19 तुमने बुरे काम किये, और वे बुरी चीजें तुम्हें केवल दण्ड दिलाएंगी।
20 “यहूदा बहुत पहले तुमने अपना जुआ फेंक दिया था।
21 यहूदा, मैंने तुम्हें विशेष अंगूर की बेल की तरह रोपा।
22 यदि तुम अपने को ल्ये से भी धोओ,
23 “यहूदा, तुम मुझसे कैसे कह सकते हो,
24 तुम उस जँगली गधी की तरह हो जो मरुभूमि में रहती है
25 यहूदा, देवमूर्तियों के पीछे दौड़ना बन्द करो।
26 “चोर लज्जित होता है जब उसे लोग पकड़ लेते हैं।
27 वे लोग लकड़ी के टुकड़ो से बातें करते हैं, वे कहते हैं,
28 उन देवमूर्तियों को आने और तुमको बचाने दो!
29 “तुम मुझसे विवाद क्यों करते हो
30 “यहूदा के लोगों, मैंने तुम्हारे लोगों को दण्ड दिया,
31 इस पीढ़ी के लोगों, यहोवा के सन्देश पर ध्यान दो:
32 क्या कोई युवती अपने आभूषण भूलती है नहीं।
33 “यहूदा, तुम सचमुच प्रेमियों (झूठे देवताओं) के पीछे पड़ना जानते हो।
34 तुम्हारे हाथ खून से रंगे हैं! यह गरीब और भोले लोगों का खून है।
35 किन्तु तुम फिर कहते रहते हो, ‘हम निरपराध हैं।
36 तुम्हारे लिये इरादे को बदलना बहुत आसान हैं।
37 ऐसा होगा कि तुम मिस्र भी छोड़ोगे