1 यहोवा ने मुझसे कहा, “यिर्मयाह, यदि मूसा और शमूएल भी यहूदा के लोगों के लिये प्रार्थना करने वाले होते, तो भी मैं इन लोगों के लिये अफसोस नहीं करता। यहूदा के लोगों को मुझसे दूर भेजो। उनसे जाने को कहो।
2 वे लोग तुमसे पूछ सकते हैं, ‘हम लोग कहाँ जाएंगे’ तुम उनसे यह कहो, यहोवा जो कहता है, वह यह है:
3 यहोवा कहता है कि मैं चार प्रकार की विनाशकारी शक्तियाँ उनके विरुद्ध भेजूँगा।”
4 मैं यहूदा के लोगों को ऐसा दण्ड दूँगा
5 “यरूशलेम नगर, तुम्हारे लिये कोई अफसोस नहीं करेगा।
6 यरूशलेम, तुमने मुझे छोड़ा।”
7 मैं अपने सूप से यहूदा के लोगों को फटक दूँगा।
8 अनेक स्त्रियाँ अपने पतियों को खो देंगी।
9 शत्रु तलवार से आक्रमण करेगा और लोगों को मारेगा।
10 हाय माता, तूने मुझे जन्म क्यों दिया
11 यहोवा सच ही, मैंने तेरी ठीक सेवा की है।
12 “यिर्मयाह, तुम जानते हो कि कोई व्यक्ति लोहे के
13 यहूदा के लोगों के पास सम्पत्ति और खजाने हैं।
14 यहूदा के लोगों, मैं तुम्हें तुम्हारे शत्रुओं का दास बनाऊँगा।
15 हे यहोवा, तू मुझे समझता है।
16 तेरा सन्देश मुझे मिला और मैं उसे निगल गया।
17 मैं कभी भीड़ में नहीं बैठा क्योंकि उन्होंने हँसी उड़ाई और मजा लिया।
18 मैं नहीं समझ पाता कि मैं क्यों अब तक घायल हूँ
19 तब यहोवा ने कहा, “यिर्मयाह, यदि तुम बदल जाते हो
20 मैं तुम्हें शक्तिशाली बनाऊँगा।
21 “मैं तुम्हारा उद्धार उन बुरे लोगों से करूँगा।