Jó 41

HIN2010

1 “अय्यूब, बता, क्या तू लिब्यातान (सागर के दैत्य) को

2 अय्यूब, क्या तू लिब्यातान की नाक में नकेल डाल सकता है?

3 अय्यूब, क्या लिब्यातान आजाद होने के लिये तुझसे विनती करेगा

4 अय्यूब, क्या लिब्यातान तुझसे सन्धि करेगा?

5 अय्यूब, क्या तू लिब्यातान से वैसे ही खेलेगा जैसे तू किसी चिड़ियाँ से खेलता है?

6 अय्यूब, क्या मछुवारे लिब्यातान को तुझसे खरीदने का प्रयास करेंगे?

7 अय्यूब, क्या तू लिब्यातान की खाल में और माथे पर भाले फेंक सकता है?

8 “अय्यूब, लिब्यातान पर यदि तू हाथ डाले तो जो भयंकर युद्ध होगा, तू कभी भी भूल नहीं पायेगा?

9 और यदि तू सोचता है कि तू लिब्यातान को हरा देगा

10 कोई भी इतना वीर नहीं है,

11 मुझको (परमेश्वर को) किसी भी व्यक्ति कुछ नहीं देना है।

12 अय्यूब, मैं तुझको लिब्यातान के पैरों के विषय में बताऊँगा।

13 कोई भी व्यक्ति उसकी खाल को भेद नहीं सकता।

14 लिब्यातान को कोई भी व्यक्ति मुख खोलने के लिये विवश नहीं कर सकता है।

15 लिब्यातान की पीठ पर ढालों की पंक्तियाँ होती है,

16 ये ढ़ाले आपस में इतनी सटी होती हैं

17 ये ढाले एक दूसरे से जुड़ी होती हैं।

18 लिब्यातान जब छींका करता है तो ऐसा लगता है जैसे बिजली सी कौंध गई हो।

19 उसके मुख से जलती हुई मशालें निकलती है

20 लिब्यातान के नथुनों से धुआँ ऐसा निकलता है,

21 लिब्यातान की फूँक से कोपले सुलग उठते हैं

22 लिब्यातान की शक्ति उसके गर्दन में रहती हैं,

23 उसकी खाल में कही भी कोमल जगह नहीं है।

24 लिब्यातान का हृदय चट्टान की तरह होता है, उसको भय नहीं है।

25 लिब्यातान जागता है, बली लोग डर जाते हैं।

26 लिब्यातान पर जैसे ही भाले, तीर और तलवार पड़ते है

27 लोहे की मोटी छड़े वह तिनसे सा

28 बाण लिब्यातान को नहीं भगा पाते हैं,

29 लिब्यातान पर जब मुगदर पड़ता है तो उसे ऐसा लगता है मानों वह कोई तिनका हो।

30 लिब्यातान की देह के नीचे की खाल टूटे हुऐ बर्तन के कठोर व पैने टुकड़े सा है।

31 लिब्यातान पानी को यूँ मथता है, मानों कोई हँड़ियाँ उबलती हो।

32 लिब्यातान जब सागर में तैरता है तो अपने पीछे वह सफेद झागों जैसी राह छोड़ता है,

33 लिब्यातान सा कोई और जन्तु धरती पर नहीं है।

34 वह अत्याधिक गर्वीले पशुओं तक को घृणा से देखता है।

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