Jó 39

HIN2010

1 “अय्यूब, क्या तू जानता है कि पहाड़ी बकरी कब ब्याती हैं?

2 अय्यूब, क्या तू जानता है पहाड़ी बकरियाँ और माता हरिणियाँ कितने महीने अपने बच्चे को गर्भ में रखती हैं?

3 वे लेट जाती हैं और बच्चों को जन्म देती है,

4 पहाड़ी बकरियों और हरिणी माँ के बच्चे खेतों में हृष्ट—पुष्ट हो जाते हैं।

5 “अय्यूब, जंगली गधों को कौन आजाद छोड़ देता है

6 यह मैं (यहोवा) हूँ जिसने बनैले गधे को घर के रूप में मरुभूमि दिया।

7 बनैला गधा शोर भरे नगरों के पास नहीं जाता है

8 बनैले गधे पहाड़ों में घूमते हैं

9 “अय्यूब, बता, क्या कोई जंगली सांड़ तेरी सेवा के लिये राजी होगा

10 अय्यूब, क्या तू जंगली सांड़ को रस्से से बाँध कर

11 अय्यूब, क्या तू किसी जंगली सांड़ के भरोसे रह सकता है

12 क्या तू उसके भरोसे है कि वह तेरा अनाज इकट्ठा

13 “शुतुरमुर्ग जब प्रसन्न होता है वह अपने पंख फड़फड़ाता है किन्तु शुतुरमुर्ग उड़ नहीं सकता।

14 शुतुरमुर्ग धरती पर अण्डे देती है,

15 किन्तु शुतुरमुर्ग भूल जाता है कि कोई उसके अण्डों पर से चल कर उन्हें कुचल सकता है,

16 शुतुरमुर्ग अपने ही बच्चों पर निर्दयता दिखाता है

17 ऐसा क्यों क्योंकि मैंने (परमेश्वर) उस शुतुरमुर्ग को विवेक नहीं दिया था।

18 किन्तु जब शुतुरमुर्ग दौड़ने को उठती है तब वह घोड़े और उसके सवार पर हँसती है,

19 “अय्यूब, बता क्या तूने घोड़े को बल दिया

20 अय्यूब, बता जैसे टिड्डी कूद जाती है क्या तूने वैसा घोड़े को कुदाया है?

21 घोड़ा प्रसन्न है कि वह बहुत बलशाली है

22 घोड़ा डर की हँसी उड़ाता है क्योंकि वह कभी नहीं डरता।

23 घोड़े की बगल में तरकस थिरका करते हैं।

24 घोड़ा बहुत उत्तेजित है, मैदान पर वह तीव्र गति से दौड़ता है।

25 जब बिगुल की ध्वनि होती है घोड़ा कहा करता है “अहा!”

26 “अय्यूब, क्या तूने बाज को सिखाया अपने पंखो को फैलाना और दक्षिण की ओर उड़ जाना?

27 अय्यूब, क्या तू उकाब को उड़ने की

28 उकाब चट्टान पर रहा करता है।

29 उकाब किले से अपने शिकार पर दृष्टि रखता है।

30 उकाब के बच्चे लहू चाटा करते हैं

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