1 “हे यरूशलेम, हे मेरे प्रकाश, तू उठ जाग!
2 आज अन्धेरे ने सारा जग
3 उस समय सभी देश तेरे प्रकाश (परमेश्वर) के पास आयेंगे।
4 अपने चारों ओर देख! देख, तेरे चारों ओर लोग इकट्ठे हो रहे हैं और तेरी शरण में आ रहे हैं।
5 “ऐसा भविष्य में होगा और ऐसे समय में जब तुम अपने लोगों को देखोगे
6 मिद्यान और एपा देशों के ऊँटों के झुण्ड तेरी धरती को ढक लेंगे।
7 केदार की भेड़ें इकट्ठी की जायेंगी
8 इन लोगों को देखो!
9 सुदूर देश मेरी प्रतिक्षा में हैं।
10 दूसरे देशों की सन्तानें तेरी दीवारें फिर उठायेंगी
11 तेरे द्वार सदा ही खुले रहेंगे।
12 कुछ जाति और कुछ राज्य तेरी सेवा नहीं करेंगे किन्तु वे जातियाँ
13 लबानोन की सभी महावस्तुएं तुझको अर्पित की जायेंगी।
14 वे ही लोग जो पहले तुझको दु:ख दिया करते थे, तेरे सामने झुकेंगे।
15 “फिर तुझको अकेला नहीं छोड़ा जायेगा।
16 तेरी जरूरत की वस्तुएँ तुझको जातियाँ प्रदान करेंगी।
17 फिलहाल तेरे पास ताँबा है
18 तेरे देश में हिंसा और तेरी सीमाओं में तबाही और बरबादी कभी नहीं सुनाई पड़ेगी।
19 “दिन के समय में तेरे लिये सूर्य का प्रकाश नहीं होगा
20 तेरा ‘सूरज’ फिर कभी भी नहीं छिपेगा।
21 “तेरे सभी लोग उत्तम बनेंगे।
22 छोटे से छोटा भी विशाल घराना बन जायेगा।